जीवन के संधर्श में राही तो बदलते है,
प्रेम की गलियो मे मंजिल तो एक ही है।
आनंद के दायरे मे न कोई दूजा रहेता है,
विश्वास के आलम में न उदासी रहेती।
ज्ञान के छाँव में न कोई प्यासा रहेता है,
मंजिलो के मंजिल मे न कोई भटकता है।
ईश्वर की कृपा से न कोई वंचित रहेता है,
सुमन ख्यालो मे न कोई विकार टिकता है।
अंधेरो मे सिर्फ प्रार्थना का प्रकाश मिलता है,
अंतर के सफर में बस गुरु ही सच्चा साथी रहेता है।
- डॉ. हीरा