ये मनुष्य भी कुछ अजीब है, य मनुष्य भी कुछ अजीब है।
आँखो ने जो देखा वो दिल ने उतारा, ये मनुष्य भी कुछ अजीब है।
जो कानो ने सुना, वो विचारों में समाया, ये मनुष्य...
जो हाथों ने किया, वो मुँह ने कहा, ये मनुष्य...
दिल ने जो चाहा, वो मन से मनाया, ये मनुष्य...
जो कदम, पैर हैं चले, वो अहम् ने खाया, ये मनुष्य...
जो हकीकत में न हुआ, वो ख्यालों में हो गया, ये मनुष्य…
जो खूबसूरती को चाहे, वो कीचड़ उछाले, ये मनुष्य...
जो शौहरत को चाहे, वो औरत में गँवाए, ये मनुष्य...
जो खुद को खुदा समझे, वो खुदा को भी न जाने, ये मनुष्य...
- डॉ. हीरा