क्या फरियाद करें हम तुझसे, ऐ मेरे मीत।
कि जान गए अब हम हमारी गलती, शिकवा न कोई तुझसे मीत।
प्यार करते हो तुम मुझसे, पर वो प्यार न हमें मिल सका।
प्यार जो प्रभु ने किया, वो हमें ना मिल सका।
बदनसीब हम अपने आप को कहें, कि तुझे हम ना पा सकें।
फिर क्या शिकायत, क्या गिला कि हम तुम्हें ना जीत सके।
अफसोस है हमें इस बात पे, कि तुझे हमने परेशान किया।
न तुम कभी हमारे थे, ये स्वीकार करना मुश्किल हुआ।
पर अब हम जान गए और फूटे हैं हमारे सारे भ्रम।
कि तुम्हे प्यार करने से अब न रोकेंगे हम।
- डॉ. हीरा