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Shiv Stotra - 2

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Shiv Stotra - 2


Date: 19-Jul-2015
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गुप्त काशी में बसा है काशी विश्वनाथ,

उत्तरकाशी में स्थापित है जगत पिता विश्वनाथ,

केदार में बसा है केदारेश्वर नाथ,

बदरी में बैठा है बदरिओं का नाथ,

कैलाश में बसा है जगन्ननाथ,

पुरी में उसकी आरती है, उसे कहते हैं भोलेनाथ,

अरुनाचल में बसे हैं पालेश्वर नाथ,

हिमाचल में बसे हैं ओंकारेश्वर नाथ,

हर ज्योतियलिँग में बसे है असीम नाथ,

सोमनाथ में है सिद्धो के नाथ,

त्रंबक में है ऋषियों के नाथ,

द्वारका में बैठे हैं गरीबों के नाथ,

खाजा में बसते हैं सुफियों के नाथ,

नाथ में बिराजते हैं सब के नाथ,

नवनाथ में भी तो है वही नाथ,

नाथो के नाथ, यही है ब्रह्मनाथ।



- डॉ. ईरा शाह
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gupta kāśī mēṁ basā hai kāśī viśvanātha,

uttarakāśī mēṁ sthāpita hai jagata pitā viśvanātha,

kēdāra mēṁ basā hai kēdārēśvara nātha,

badarī mēṁ baiṭhā hai badariōṁ kā nātha,

kailāśa mēṁ basā hai jagannanātha,

purī mēṁ usakī āratī hai, usē kahatē haiṁ bhōlēnātha,

arunācala mēṁ basē haiṁ pālēśvara nātha,

himācala mēṁ basē haiṁ ōṁkārēśvara nātha,

hara jyōtiyalim̐ga mēṁ basē hai asīma nātha,

sōmanātha mēṁ hai siddhō kē nātha,

traṁbaka mēṁ hai r̥ṣiyōṁ kē nātha,

dvārakā mēṁ baiṭhē haiṁ garībōṁ kē nātha,

khājā mēṁ basatē haiṁ suphiyōṁ kē nātha,

nātha mēṁ birājatē haiṁ saba kē nātha,

navanātha mēṁ bhī tō hai vahī nātha,

nāthō kē nātha, yahī hai brahmanātha।
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गुप्त काशी में बसा है काशी विश्वनाथ, उत्तरकाशी में स्थापित है जगत पिता विश्वनाथ, केदार में बसा है केदारेश्वर नाथ, बदरी में बैठा है बदरिओं का नाथ, कैलाश में बसा है जगन्ननाथ, पुरी में उसकी आरती है, उसे कहते हैं भोलेनाथ, अरुनाचल में बसे हैं पालेश्वर नाथ, हिमाचल में बसे हैं ओंकारेश्वर नाथ, हर ज्योतियलिँग में बसे है असीम नाथ, सोमनाथ में है सिद्धो के नाथ, त्रंबक में है ऋषियों के नाथ, द्वारका में बैठे हैं गरीबों के नाथ, खाजा में बसते हैं सुफियों के नाथ, नाथ में बिराजते हैं सब के नाथ, नवनाथ में भी तो है वही नाथ, नाथो के नाथ, यही है ब्रह्मनाथ। Shiv Stotra - 2 2015-07-19 https://www.myinnerkarma.org/stotra/default.aspx?title=shiv-stotra-2