जिस हाथ ने इतना कुछ दिया, वो हाथ अब पीछे क्यों हट गया?
जिसे अपना मानकर चल पड़े हम, वो अब हम से दूर क्यों हो गया?
क्या भूल हो गई हमसे, कि खामोश हो गए तुम, वो हाथ…
मुस्कुराकर बोले कि कोई बात नहीं है, तो आँसू क्यों आ गए आँखों में, वो हाथ…
कहा जब हम एक ही हैं, तो हमें अलग समझकर ये दिल क्यों तोड़ा, वो हाथ…
निकल पड़े राह में हम तेरे संग-संग, तो बीच में पाया कि बिछड़ गए हम, वो हाथ…
क्या ये मेरा भ्रम है या मेरा सपना, तो उसे मिटा क्यों नहीं देते तुम?
झेल लेंगे हम दुनियावालों के ताने, पर झेल न पायेंगे हम ये दूरी, ये हाथ…
मंज़िल है मेरी बस तू ही, वो मंज़िल अब हमे क्यों दूर होती दिखाई दे रही है, ये हाथ…
क्या भूल हो गई हमसे, ये दुबारा पूछते हैं हम, क्योंकि
जी नहीं सकते अब हम तेरे बिना।
- डॉ. हीरा